मार्च 22, 2012

रात...

 
सूरज सी दहकती हैं
मेरी धड़कनें
चांदनी में निचोड़कर
माथे पर रखो
ठंडी रात...
गर्म सांसों को
आराम आ जाए।
 
सरकने दो रात को
आहिस्ता आहिस्ता
चांद आता रहे खिड़की से
थोड़ा थोड़ा
बंद किवाड़ों से भी
आ ही जाएगा सूरज
बांट लेते हैं तब तक
आधी आधी रात
आधा आधा चांद
सुबह हिसाब कर लेंगे।

रात के होठों पर चुप सी लगी है
आंखें बोझिल हैं चांद की
आज की रात
बोलनें दें खामोशियों को
अपने अपने हिस्से के आसमान में
कोई टूटता तारा ढूंढें
कोई रूठी हुई मन्नत
शायद पूरी हो जाए।

बिखरने की आदत है,
यूं समेट लो मुझको
कि सहर होने तक
समूचा रहे जिस्म,
साबुत हो रूह
रतजगे बहुत हुए
आज सोने का मन है
सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
ख्वाब गीले हो जाएंगे।

54 टिप्‍पणियां:

  1. सरकने दो रात को
    आहिस्ता आहिस्ता
    चांद आता रहे खिड़की से
    थोड़ा थोड़ा
    बंद किवाड़ों से भी
    आ ही जाएगा सूरज
    बांट लेते हैं तब तक
    आधी आधी रात
    आधा आधा चांद
    सुबह हिसाब कर लेंगे।... अरे वाह

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  2. बिखरने की आदत है,
    यूं समेट लो मुझको
    कि सहर होने तक
    समूचा रहे जिस्म,
    साबुत हो रूह
    रतजगे बहुत हुए
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,,......

    my resent post


    काव्यान्जलि ...: अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.

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  3. सुन्दर सृजन, सुन्दर भावाभिव्यक्ति.

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  4. चांद आता रहे खिड़की से
    थोड़ा थोड़ा
    बंद किवाड़ों से भी
    आ ही जाएगा सूरज
    बांट लेते हैं तब तक
    आधी आधी रात
    आधा आधा चांद
    सुबह हिसाब कर लेंगे।

    खूबसूरत एहसास ...
    रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।

    बहुत सुंदर भाव ... मैं तो गीले ख्वाबों की कल्पना कर रही हूँ .... क्यों कि दोस्त रोया तो ज़रूर होगा ...

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  5. बहुत सुन्दर एहसास...एकदम रूह से निकलती कविता !
    ...पाँच स्टार !

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  6. बिखरने की आदत है,
    यूं समेट लो मुझको
    कि सहर होने तक
    समूचा रहे जिस्म,
    साबुत हो रूह
    रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।
    बेहतरीन ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपको नव संवत्सर 2069 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ----------------------------
    कल 24/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. गहन अभिव्यक्ति....सुन्दर कविता

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  9. बांट लेते हैं तब तक
    आधी आधी रात
    आधा आधा चांद
    सुबह हिसाब कर लेंगे।...

    बहुत सुन्दर ख़याल, धन्यवाद!
    सादर

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  10. Awesomely beautiful!!
    do-teen baar padha is kavita ko...Just awesome :) :)

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  11. बिखरने की आदत है,
    यूं समेट लो मुझको
    कि सहर होने तकwaah gazab ke expression....

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  12. खुबसूरत नज़्म... सुन्दर प्रयोग...
    सादर बधाई...

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  13. बहुत बहुत सुन्दर..........

    हर पंक्ति ख्वाब की एक सीढ़ी सी लगी...चढ़ते चढ़ते चाँद तक पहुँच गयी मैं भी....

    लाजवाब दीपिका.

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  14. बहुत ही खूबसूरत रचना !

    अपने अपने हिस्से के आसमान में
    कोई टूटता तारा ढूंढें
    कोई रूठी हुई मन्नत
    शायद पूरी हो जाए।

    मन मुग्ध हो गया ! बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं !

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  15. बहुत सुन्दर मनमोहित करती रचना...
    :-)

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  16. सूरज सी दहकती हैं
    मेरी धड़कनें
    चांदनी में निचोड़कर
    माथे पर रखो
    ठंडी रात...
    गर्म सांसों को
    आराम आ जाए।....सच! विचार मात्र से ही एक ठंडक छू गयी भीतर तक .....सुन्दर अभिव्यक्ति !!!

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  17. "सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे"

    वाह ! ! अति सुन्दर .

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  18. "सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे"...

    बहुत सुंदर और गहरे भाव ... !!

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  19. बेहद गहरे अहसास लिए ख़ूबसूरत कविता

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  20. आपके लफ़्ज़ रूह तक उतर कर अपनी बात कहते हैं। अनुभूति की गहराई देखते ही बनती है। भाषा इतनी प्रभावोत्पादक कि देर तक शब्द अपना असर क़ायम रखते हैं। कविता खत्म होने के बाद भी। आपकी भाषा में चित्रात्मकता है लगता है कि कलम नहीं तूलिका चल रही है काग़ज़ पर और चित्र बनते जा रहे हों। बधाई इतनी पुरअसर रचना के लिए।

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  21. चांदनी में निचोड़कर
    माथे पर रखो
    ठंडी रात...
    गर्म सांसों को
    आराम आ जाए।
    बहुत खूबसूरत शब्द

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  22. बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति । मेरे पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।.

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  23. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  24. रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।

    शब्दों और भावों की बढि़या कारीगरी।

    उत्तर देंहटाएं
  25. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती आप के ब्लॉग पे आने के बाद असा लग रहा है की मैं पहले क्यूँ नहीं आया पर अब मैं नियमित आता रहूँगा
    बहुत बहुत धन्यवाद् की आप मेरे ब्लॉग पे पधारे और अपने विचारो से अवगत करवाया बस इसी तरह आते रहिये इस से मुझे उर्जा मिलती रहती है और अपनी कुछ गलतियों का बी पता चलता रहता है
    दिनेश पारीक
    मेरी नई रचना

    कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: माँ की वजह से ही है आपका वजूद:
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2012/03/blog-post_15.html?spref=bl

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  26. बहुत खूब ... गहरे एहसास जैसे रचना में उतार दिए हैं ...

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  27. सबसे पहले हमारे ब्लॉग 'जज्बात....दिल से दिल तक' पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.........आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे|

    कभी फुर्सत में हमारे ब्लॉग पर भी आयिए- (अरे हाँ भई, सन्डे को भी)

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    एक गुज़ारिश है ...... अगर आपको कोई ब्लॉग पसंद आया हो तो कृपया उसे फॉलो करके उत्साह बढ़ाये|

    उत्तर देंहटाएं
  28. पूरी रचना में रात के अलग अलग भाव हैं. जैसे छोटी छोटी क्षणिकाएं रात को अपने अपने हिस्से की रौशनी दे रही हो और चाँद से चांदनी ले रही हो. बहुत सुन्दर भाव...

    बिखरने की आदत है,
    यूं समेट लो मुझको
    कि सहर होने तक
    समूचा रहे जिस्म,
    साबुत हो रूह
    रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  29. बिखरने की आदत है,
    यूं समेट लो मुझको
    कि सहर होने तक
    समूचा रहे जिस्म,
    साबुत हो रूह
    रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।
    touching lines with feelings and emotions.

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  30. सरकने दो रात को
    आहिस्ता आहिस्ता
    चांद आता रहे खिड़की से
    थोड़ा थोड़ा......
    खूबसूरत कृति....मन मोहित हो गया... आज अचानक बाग बगीचे की शोभा निरखते इधर आ गई...और श्रम भूल गई
    सादर
    यशोदा

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  31. बहुत ही अच्छी रचना पढने को मिली --------धन्यवाद

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  32. ख्वाब गीले हो जाएंगे।
    wah.....kya mulayamiyat hai.....

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  33. बांट लेते हैं तब तक
    आधी आधी रात
    आधा आधा चांद
    सुबह हिसाब कर लेंगे।

    बहुत सुन्दर ख्याल ..बांटने के लिए आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  34. रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है

    बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति ...

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  35. बाप रे....क्या बात है....नाम हो गया बिलकुल मैं तो....!!!

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  36. अरे ये तो गलती ही हो गयी....नम कहना था ना मुझे...
    आप्शन देखे ही नहीं....स्पेस दबा दिया...

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    उत्तर
    1. सुन्दर प्रस्तुति, सुन्दर भावाभिव्यक्ति, बधाई.

      हटाएं
  37. बिखरने की आदत है,
    यूं समेट लो मुझको
    कि सहर होने तक
    समूचा रहे जिस्म,
    साबुत हो रूह
    रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।..
    दीपिका जी जय श्री राधे -खूबसूरत मन को छू लेने वाले भाव .अनूठी रचना ...बधाई हो
    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण

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  38. बहुत सुन्दर लिखा अपे !

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  39. बहुत सुन्दर लिखा आपने !

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  40. सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/03/blog-post_12.html

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  41. बेहद ख़ूबसूरत गहन भाव पूर्ण अभिव्यक्ति ..
    शुभ कामनाएं !!!

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  42. रतजगे बहुत हुए
    आज सोने का मन है
    सिरहाने रोना मत ऐ दोस्त
    ख्वाब गीले हो जाएंगे।
    नायाब बिम्ब सृजन .. लाजवाब

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