मई 20, 2020

मयकशी की बात रहने दीजिए


मयकशी की बात रहने दीजिए
हमें तो अरसा हुआ तौबा किए

होश में वो आएं जो मदहोश हों
तोहमतें मत अब लगाया कीजिए

चांद की तन्हाई उसको ही पता
साथ उसके रतजगे जिसने किए

फिक्र जिनको है फ़क़त रुसवाई की
ज़िक्र अब उनका भला क्या कीजिए

जिस्म तो बस धड़कनों का खेल है
यहां हम हैं रूह का सौदा किए

कौन सी उल्फ़त कहां की कुरबतें
बज़्म में उनकी खड़े हैं लब सिए

हसरतें ले जाओ, रहने दो मगर
मुख़्तसर से ख्वाब जो हमने जिए


7 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (22-05-2020) को
    "धीरे-धीरे हो रहा, जन-जीवन सामान्य।" (चर्चा अंक-3709)
    पर भी होगी। आप भी
    सादर आमंत्रित है ।
    …...
    "मीना भारद्वाज"

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  2. वाह ! बेहतरीन सृजन.
    सादर

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  3. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे
    Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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  4. उम्दा लिखावट ऐसी लाइने बहुत कम पढने के लिए मिलती है धन्यवाद् (सिर्फ आधार और पैनकार्ड से लिजिये तुरंत घर बैठे लोन)

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