कुछ समय पहले कुछ हाइकु लिखे थे जो hindihaiku.wordpress.com पर प्रकाशित हुए थे। आज सोचा उसे यहां भी शेयर करूं। दिन के चार अलग-अलग समयों पर लिखे हाइकु पेश हैं:
1
भोर का राग
बुलबुल ने गाया
अब तो जाग
2
संदली दिन
लागे अमावस सा
पिया के बिन
3
सूरज लाल
सांझ की महफिल
जमी कमाल
4
रात नशीली
चांदनी में घोली थी
किसने पी ली?
कुछ और हाइकु लिखने की कोशिश की थी। विवाह के समय एक बिटिया की मनस्थितियों पर -
1
भोर का राग
बुलबुल ने गाया
अब तो जाग
2
संदली दिन
लागे अमावस सा
पिया के बिन
3
सूरज लाल
सांझ की महफिल
जमी कमाल
4
रात नशीली
चांदनी में घोली थी
किसने पी ली?
कुछ और हाइकु लिखने की कोशिश की थी। विवाह के समय एक बिटिया की मनस्थितियों पर -
1
मां का आंचल
जीवन की धूप में
जैसे बादल
2
कोई न भूले
बाबुल की गलियां
बाहों के झूले
3
बहना प्यारी
आएगी याद अब
बातें तुम्हारी
4
ओ री सहेली
जीवन ये लागे है
जैसे पहेली
5
जो था अंजाना
अब वो है अपना
कैसा फसाना
6
हुई परायी
जिस घर में खेली
अम्मा की जायी
7
ले अब चली
बगियन में पी की
नाजुक कली
8
गूंजेंगे गीत
मादक मिलन से
जागेगी प्रीत