पुराने ख़तों की गर्द जब उड़ती है
आंखों में कोई याद सी चुभती है
बड़े दिन हुए, न आया डाकिया
क्या भूल गया है तू घर का पता
नए संदेशे आएंगे तो जरूर
नए मौसम की खबर कोई तो भेजेगा।
बंद लिफाफे में,
खुशियों की आहट होगी।
कोरे पन्ने पर,
शोख मुस्कराहट होगी।
जो भीनी खुश्बू में भीगा होगा।
वो ख़त जरूर मेरा होगा।
तेरी खुशियों के झोले में
डाकिया देख मेरा कोई ख़त तो नहीं!
आंखों में कोई याद सी चुभती है
बड़े दिन हुए, न आया डाकिया
क्या भूल गया है तू घर का पता
नए संदेशे आएंगे तो जरूर
नए मौसम की खबर कोई तो भेजेगा।
बंद लिफाफे में,
खुशियों की आहट होगी।
कोरे पन्ने पर,
शोख मुस्कराहट होगी।
जो भीनी खुश्बू में भीगा होगा।
वो ख़त जरूर मेरा होगा।
तेरी खुशियों के झोले में
डाकिया देख मेरा कोई ख़त तो नहीं!
